एक नादानी एक शैतानी,
और गुदगुदाती हुई एक बदमाशी
बातों भी हो उसकी मानो,
फिक्र से महरूम चुटकी भर एक खुशी।
कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं,
बातों में उसकी छल का भी कोई ज़ोर नहीं
फिर भी उसको सुनते सुनते ये लगता है,
की इस पल से हसीन अब तो कोई दौर नहीं
उसकी बांतों का मतलब मुझसे न पूछो, में तो देखता हु बांतों मे छुपी मासूम सी हंसी,
बातों भी हो उसकी मानो, फिक्र से महरूम चुटकी भर एक खुशी।
जब भी कोई लम्हा उसको हंसता है,
उसकी बांतों का पिटारा मेरे लिए तैयार हो जाता है,
फिर अगले दिन सबेरे की चाय पर,
उस पिटारे में बंद वो लम्हा फिर से खुल जाता है,
महसूस कर लेता हु में भी उस लम्हे को, वरना तो जीवन में मेरे लगी हो ऐसे पलों पर जैसे कोई अंकुशी,
बातों भी हो उसकी मानो, फिक्र से महरूम चुटकी भर एक खुशी।
रूठ कर मेरे किसी स्वभाव पर,
उसने कहा की बांतों का उसके पास अब ना कोई बहाना है,
इसीलिए ये कलम लिए बैठा हु आज,
इन शब्दों से उसे जो मनाना है।
मना लूंगा उसे इस बार भी मैं, ले आऊंगा उसके चेहरे पे फिर से खिलखिलाती हुई हंसी,
बातों भी हो उसकी मानो, फिक्र से महरूम चुटकी भर एक खुशी।