कुछ अनकही तो कुछ अनसुनी,
कुछ बातें आज बस कहनी और सुननी है,
की खामोश हो जा ऐ जुबान आज तू,
मेरे दिल को इन आँखों से थोड़ी सी गुफ़्तगू करनी है।
सच कहूँ तो ये आंखे हमेशा,
मेरे दिल की मुरादों की तस्वीर बन जाती है,
धुंधली हो जाती है ये तस्वीर भी ऐ जुबान अक्सर,
जब भी कभी तू किसी और की उम्मीदों से समझौता कर जाती है।
खड़ा हु सामने आईने के आज मैं, मुझे ये तस्वीर देखनी है,
की खामोश हो जा ऐ जुबान आज तू,
मेरे दिल को इन आँखों से थोड़ी सी गुफ़्तगू करनी है।
अक्सर बिना किसी शब्द के ये आंखें,
कुछ हाले दिल बयां कर जाती है,
नहीं समझ पाते कुछ लोग इस खामोशी को,
उनके लिए तो मेरी आंखे मेरी जुबान से मेल नहीं खाती हैं
ऐसे ही किसी खास शख्स को आज, कुछ बांते बस नज़रों से कहनी है,
की खामोश हो जा ऐ जुबान आज तू, मेरे दिल को इन आँखों से थोड़ी सी गुफ़्तगू करनी है।
तन्हा हर मोड़ पर इस दिल के लिए,
ये आंखे ही हमदम एक हमसफर बन जाती है,
भीग जाती है थोड़ी सी कुछ उदासी में ये,
और किसी हसीन सपने से अक्सर इस दिल को हंसाती है,
दे दे चंद पल का समय आज कुछ, इस टूटे रिश्ते की कड़ी मुझे फिर से जोड़नी है,
की खामोश हो जा ऐ जुबान आज तू, मेरे दिल को इन आँखों से थोड़ी सी गुफ़्तगू करनी है।