क्यों नहीं मिलता सुकून अब किसी भी मुकाम पर,ये सवाल आज हम इस खामोश दिल से पूछते हैं,की ख्वाहिशों की चकाचौंध भरी इस दुनिया में,चलो आज हम खुद को ढूंढते हैं। शुरू हुआ था स्कूल के छोटे बस्ते से जो,उम्मीदों का वो सिलसिला अभी तक चलता आ रहा है,बन गया है सपनों का एक पिटाराContinue reading “चलो आज खुद को ढूंढते हैं”
Author Archives: chintamani shukla
बगल वाली सड़क
क्या चाहा था और क्या पाया है,जीवन में मैं क्या करने निकाला था,इसी कशमकश में आज रात फिर,मैं बगल वाली सड़क पर टहलने निकला था। कुछ कदम आगे उस सड़क पर,नज़र मेरी एक नादान पर पड़ी,कपड़े फटे थे, शरीर पर धूल थी,चमका रहा था इक कार के शीशे को वो जो पास थी मेरे खड़ी,Continue reading “बगल वाली सड़क”
इसलिए मै भी लिख लेता हुँ
जो शब्द न निकल सके जुबान से,उन्हें मैं अपनी कलम से कह देता हु,की यादों की लहरों को कोई किनारा मिल जाए,इसलिए कभी कभार मैं भी लिख लेता हु। मां बाबा की आंखों में जगमगाने वाली,उम्मीद की हर किरण का सूरज मैं ही तो था,लेकिन उनसे कभी ये नहीं कह पाया की,कंधे बड़े जरूर थेContinue reading “इसलिए मै भी लिख लेता हुँ”
एक चुटकी खुशी
एक नादानी एक शैतानी,और गुदगुदाती हुई एक बदमाशीबातों भी हो उसकी मानो,फिक्र से महरूम चुटकी भर एक खुशी। कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं,बातों में उसकी छल का भी कोई ज़ोर नहींफिर भी उसको सुनते सुनते ये लगता है,की इस पल से हसीन अब तो कोई दौर नहीं उसकी बांतों का मतलब मुझसे न पूछो,Continue reading “एक चुटकी खुशी”
दो बात जिंदगी से
निरंतर खोने और पाने की इस अजीब कशमकश कोआज हम खुद से थोड़ा सा दरमियान करते हैंऐ जिंदगी आ बैठ, आज तुझसे ही दो बात करते हैं। अक्सर ये कहते हैं लोग कीदास्तान भी तू बड़ी अजीब है,किसी की कम और किसी कीतू कुछ ज्यादा ही खुशनसीब है क्यों कुछ लोग तुझे नाउम्मीद तो कुछContinue reading “दो बात जिंदगी से”
बंद आंखों के सपने
बंद आंखों के सपनों को, खुली नजरों की हकीकत से,आज फिर छिपा लेंगे,सपना है तो आखिर अपना ही, इसे फिर कभी निभा लेंगे। अपने घर का बड़ा बने हुए,हर उस बच्चे की खामोश आंखें,ये बात चीख कर कह जाती है,की जिम्मेदारियां कभी उम्र देख कर नहीं आती है, खामोश आंखों में उस बेहतर कल कीContinue reading “बंद आंखों के सपने”
घर तो पीछे छूट गया
सपनो की रेलगाड़ी पकड़कर,एक तेज रफ्तार में कुछ यू बह गया,जब खिड़की से बाहर देखा तो पता लगा,की सपनो का शहर तो मिला, लेकिन मेरा घर काफी पीछे छूट गया। गर्मी की छुट्टियों में अपने गाव तक का,आज भी वो सफर याद आता है,की बाबा उस चने वाले को रोकना,कोई बच्चा जब अपने दादाजी सेContinue reading “घर तो पीछे छूट गया”
Pagli Ladki
Agar samay mile kabhi,Toh milaunga ek pagli ladki se Soorat se masoom, ki hai chanchal wo seerat seJeevan ka har gam sharma jaye, jab hanse wo poore dil se. Uske khali man ki prishton pe jab baith akele vichar kiya,Toh ye boojha ki bin sahil wo khoob ladi hai jeevan ki lahron se. Ki agarContinue reading “Pagli Ladki”
Khushi wali Hansi
Nanhe nahe kadmo se, Ek lambe safar par kuch yoo chal diyaKi khushi wali uss hansi ko, Naa jane jeevan ke kis kone me kho diya. Wo jo aati thi dadi ke jhula jhulane par,Jo hoti thi dadaji ke ghoda ban jane parBadlon me chaand si gum jo ho jati,Pitaji ke gusse ki bas aahatContinue reading “Khushi wali Hansi”
Yaadon ki Almaari
Lamha lamha kar yu hi,Ye haseen karwan bhi gujar jayegaAur ye dil ek din bas,Yaadon ki almaari ban jayega… Teen manjila school ki, wo kathe ki seedhiyan,Jo lagti thi hum ko kabhi, nanhe pairon ki bedhiyanAadhi chutti me bajne wali wo peetal ki ghantiyanAur fir yaaron sang hone wali wo massom si mastiyan Kaun janataContinue reading “Yaadon ki Almaari”